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दिल्ली ग्रीन बजट 2026-27 पास, सीएम रेखा गुप्ता ने AAP पर साधा निशाना
- Reporter 12
- 28 Mar, 2026
बजट सत्र के आखिरी दिन सर्वसम्मति से पास हुआ ग्रीन बजट, सीएम ने पिछली सरकार पर कर्ज, अधूरी परियोजनाओं और संस्थागत घाटे को लेकर साधा निशाना
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन वर्ष 2026-27 का ग्रीन बजट सर्वसम्मति से पारित हो गया। हालांकि इस बजट में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया, लेकिन सदन के भीतर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को काफी गर्म बनाए रखा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट को दिल्ली के लिए “नई दिशा” बताने के साथ ही विपक्ष, खासकर आम आदमी पार्टी, पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने के लिए चुना, वे सदन में मौजूद नहीं हैं और ऐसा लगता है कि विपक्ष ने अब “सड़क की राजनीति” को ही अपना रास्ता मान लिया है।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों ने बजट की खूबियां गिनाईं और इसे विकास, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और वित्तीय अनुशासन की दिशा में अहम कदम बताया। दूसरी ओर विपक्ष की गैरमौजूदगी को लेकर भी सत्तापक्ष ने लगातार सवाल उठाए।
सदन में पास हुआ ग्रीन बजट, सरकार ने बताया ‘नई सोच का दस्तावेज’
विधानसभा में पारित इस बजट को सरकार ने केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य का खाका बताया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह बजट राजधानी को “जवाबदेह शासन” और “नियोजित विकास” की दिशा में आगे बढ़ाने वाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब दिल्ली में योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि तय समयसीमा और जवाबदेही के साथ जमीन पर उतारी जाएंगी।
सरकार का दावा है कि इस बजट में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इसी वजह से इसे ग्रीन बजट का नाम दिया गया है। इसमें शहरी ढांचे के विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया गया है।
सीएम का विपक्ष पर हमला, कहा—‘जनता देगी जवाब’
बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री का सबसे तीखा हमला विपक्ष पर देखने को मिला। उन्होंने सदन में कहा कि जिन विधायकों को जनता ने अपनी आवाज उठाने के लिए चुना, वे सदन में आने से बच रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर विपक्ष ने सड़क पर ही रहने का फैसला कर लिया है, तो दिल्ली की जनता अगली बार उन्हें वहीं स्थायी कर देगी।
मुख्यमंत्री के इस बयान को सत्तापक्ष ने जोरदार समर्थन दिया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि लोकतंत्र में विधानसभा सबसे बड़ा मंच है, जहां जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस होनी चाहिए। ऐसे में विपक्ष का अनुपस्थित रहना न केवल राजनीतिक रूप से कमजोर संदेश देता है, बल्कि जनता के भरोसे के साथ भी न्याय नहीं करता।
साइकिल योजना पर बयानबाजी से गरमाया माहौल
सत्र के दौरान एक अन्य मुद्दा भी चर्चा में रहा—साइकिल वितरण योजना को लेकर हुई बयानबाजी। मुख्यमंत्री इस पर नाराज नजर आईं और उन्होंने साफ कहा कि दिल्ली की बेटियों को लेकर किसी भी तरह की आपत्तिजनक या असंवेदनशील टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है, और इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक तंज का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने सामाजिक संवेदनशीलता और महिला सम्मान को अपनी सरकार की प्राथमिकता के रूप में सामने रखने की कोशिश की।
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पूर्व सरकार पर कर्ज और अधूरी परियोजनाओं को लेकर बड़ा आरोप
वित्तीय बहस के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार दिल्ली पर करीब 47,000 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई है, जिसमें से 27,547 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार को सत्ता संभालते ही भारी वित्तीय बोझ और अधूरी परियोजनाओं की विरासत मिली है।
उन्होंने कहा कि कई अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहीं, जिससे न केवल उनकी लागत बढ़ी, बल्कि जनता को भी समय पर उनका लाभ नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब वर्तमान सरकार को इन लंबित योजनाओं और वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है।
एक्सप्रेसवे, मेट्रो, अस्पताल और पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि अधूरी छोड़ी गई परियोजनाओं में एक्सप्रेसवे से जुड़ी योजनाओं पर लगभग 3,700 करोड़ रुपये, मेट्रो परियोजनाओं पर 9,087 करोड़ रुपये, अस्पताल निर्माण से संबंधित 2,000 करोड़ रुपये से अधिक, और DMRC-PWD इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स में 1,031 करोड़ रुपये की देनदारी सामने आई।
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्कूल और अस्पताल लंबे समय से निर्माणाधीन अवस्था में पड़े थे, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ती रही। उनके मुताबिक, इन परियोजनाओं की धीमी गति ने न केवल सार्वजनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाला, बल्कि नागरिक सुविधाओं को भी प्रभावित किया।
सरकार का दावा—लंबित भुगतान चुकाने की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि उनकी सरकार ने लंबित देनदारियों को निपटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने दावा किया कि खिलाड़ियों, छात्रवृत्ति योजनाओं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़ी योजनाओं और किशोरी कल्याण कार्यक्रमों से जुड़े कई लंबित भुगतान किए जा चुके हैं।
इसके अलावा, SC, ST और OBC छात्रों की 114 करोड़ रुपये की ट्यूशन फीस, तथा दिल्ली सरकार के कॉलेजों से जुड़ी 538 करोड़ रुपये की देनदारियों का भुगतान भी शुरू किया गया है। सरकार ने इसे “वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक सफाई” की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
बिना काम भुगतान का आरोप, पीडब्ल्यूडी परियोजना पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) परियोजना का जिक्र करते हुए यह भी आरोप लगाया कि बिना काम पूरा हुए करीब 250 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों की समीक्षा की जा रही है और जवाबदेही तय की जाएगी।
यह बयान साफ संकेत देता है कि सरकार केवल नई योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह पुरानी परियोजनाओं और वित्तीय निर्णयों की भी जांच-पड़ताल करना चाहती है।
DTC और जल बोर्ड की हालत पर सरकार की चिंता
सदन में मुख्यमंत्री ने दिल्ली की दो बड़ी सार्वजनिक संस्थाओं—DTC और दिल्ली जल बोर्ड—की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि DTC लगभग 99,000 करोड़ रुपये के घाटे में है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है और वह 91,000 करोड़ रुपये के नुकसान से जूझ रहा है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जल बोर्ड की बिलिंग प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है। इसके कारण आम लोगों को गलत और कई बार अत्यधिक बिल मिले, जिससे जनता में असंतोष पैदा हुआ।
CM प्रगति पोर्टल से होगी परियोजनाओं की निगरानी
सरकार ने प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए CM प्रगति पोर्टल शुरू करने की बात भी कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पोर्टल के माध्यम से सभी प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाएं तय समय में पूरी हों।
यह पहल सरकार की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें “घोषणाओं” के बजाय “डिलीवरी” पर जोर देने की बात कही जा रही है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राजधानी में बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना चाहती है। उन्होंने बताया कि मुनक नहर पर 5000 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसके अलावा मेट्रो विस्तार, ईवी ट्रांजिशन, और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बजट में प्रमुखता दी गई है।
पर्यावरण के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि पहली बार 4200 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित किया गया है। साथ ही अगले चार वर्षों में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे राजधानी में हरित आवरण बढ़ेगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नई नियुक्तियों का ऐलान
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 4478 पदों को मंजूरी दी गई है, जबकि 1194 नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जा चुकी है या प्रक्रिया में है। सरकार का कहना है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मानव संसाधन बढ़ाना जरूरी है।
चार दिन का सत्र समाप्त, रिपोर्ट एलजी को भेजी जाएगी
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र के अंत में सत्रावसान की घोषणा की और कहा कि इसकी रिपोर्ट उपराज्यपाल को भेजी जाएगी। यह बजट सत्र कुल चार दिन चला, लेकिन इस दौरान राजनीतिक तापमान लगातार ऊंचा बना रहा।
सबसे अधिक चर्चा विपक्ष की गैरमौजूदगी को लेकर हुई। करीब 11 साल तक सत्ता में रही आम आदमी पार्टी के विधायकों का इस अहम बजट सत्र से दूरी बनाए रखना सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, जिसका इस्तेमाल सरकार ने विपक्ष की जवाबदेही पर सवाल उठाने के लिए किया।
निष्कर्ष: बजट पास, लेकिन राजनीतिक टकराव जारी
दिल्ली विधानसभा में ग्रीन बजट 2026-27 भले सर्वसम्मति से पारित हो गया हो, लेकिन यह सत्र केवल वित्तीय दस्तावेज के पारित होने तक सीमित नहीं रहा। इसने दिल्ली की मौजूदा राजनीति, सत्ता-पक्ष की प्राथमिकताओं, विपक्ष की रणनीति और राजधानी के विकास मॉडल को लेकर कई बड़े सवाल भी सामने रख दिए हैं।
अब असली परीक्षा बजट के लागू होने और सरकार द्वारा किए गए दावों की जमीन पर पड़ने वाले असर की होगी। लेकिन इतना तय है कि बजट सत्र का समापन राजनीतिक संदेशों और तीखी बयानबाजी के बीच हुआ है।
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